सारी भावनाएँ ठीक हैं
हर किसी में भावनाएँ होती हैं: खुशी, दुख, गुस्सा, डर, उत्साह, जलन, चिंता और भी बहुत कुछ।
कोई भी भावना बुरी नहीं होती। भावनाएँ ऐसे संदेश हैं जो हमें बताते हैं कि कोई बात ज़रूरी है।
ज़रूरी यह है कि हम अपनी भावनाओं के साथ क्या करते हैं। गुस्सा आना ठीक है। गुस्से में किसी को मारना ठीक नहीं है।
नाम दो, काबू पाओ
अपनी भावना ज़ोर से कहना, जैसे मुझे गुस्सा आ रहा है क्योंकि भाई ने मेरा खिलौना ले लिया, उस भावना को छोटा करने में मदद कर सकता है।
भावनाएँ शरीर में भी दिखती हैं। चिंता में ऐसा लग सकता है जैसे पेट में तितलियाँ उड़ रही हों। गुस्से में चेहरा गर्म लग सकता है।
शांत होने के तरीके
गुब्बारे वाली साँस: नाक से धीरे-धीरे साँस अंदर लो, जैसे पेट में एक गुब्बारा भर रहे हो, फिर मुँह से धीरे-धीरे साँस बाहर छोड़ो। ऐसा पाँच बार करो।
और भी तरीके: दस तक गिनो, थोड़ा पानी पियो, टहलने जाओ, अपनी भावना का चित्र बनाओ, किसी तकिये या पालतू जानवर को गले लगाओ, या गाना सुनो।
अपनी भावनाएँ बाँटो
किसी भरोसेमंद व्यक्ति से बात करना, जैसे माता-पिता, दादा-दादी या नाना-नानी, टीचर या दोस्त, बड़ी भावनाओं का बोझ हल्का कर सकता है।
अगर तुम बहुत दिनों तक उदास या चिंतित महसूस करो, या भावना इतनी बड़ी हो कि तुम खुद को या किसी और को चोट पहुँचाना चाहो, तो फ़ौरन किसी बड़े को बताओ।