सहमति का मतलब
सहमति का मतलब है किसी बात के लिए अपनी मर्ज़ी से, बिना किसी दबाव के हाँ कहना। यह रोज़ की चीज़ों पर लागू होती है, जैसे गले लगना, किसी का फ़ोन लेना, किसी फ़ोटो में टैग होना या कोई राज़ बताना, और शारीरिक नज़दीकी पर भी।
असली सहमति अपनी मर्ज़ी से दी जाती है, कभी भी बदली जा सकती है, पूरी जानकारी के साथ होती है (आपको पता है कि आप किस बात के लिए हाँ कह रहे हैं), दिल से होती है, और किसी ख़ास बात के लिए होती है (एक चीज़ के लिए हाँ का मतलब हर चीज़ के लिए हाँ नहीं है)।
चुप रहना, कुछ न कहना, या विरोध न करना सहमति नहीं है। जो इंसान सो रहा हो, नशे में हो या डरा हुआ हो, वह सहमति नहीं दे सकता।
स्वस्थ रिश्ते
यह दोस्ती, परिवार और प्रेम-संबंधों, सब पर लागू होता है। स्वस्थ रिश्ते में दोनों लोग सम्मान महसूस करते हैं, ना कह सकते हैं, दूसरे दोस्तों के साथ समय बिता सकते हैं और जैसे हैं वैसे रह सकते हैं।
आप बिना डर के असहमतियों पर बात करते हैं। आपको पासवर्ड बताने या अपना प्यार साबित करने की ज़रूरत नहीं होती।
ख़तरे के संकेत
आपका फ़ोन चेक करना, यह कंट्रोल करना कि आप किससे मिलें या क्या पहनें, बहुत ज़्यादा जलन, आपको नीचा दिखाना, ख़ुद को या आपको नुकसान पहुँचाने की धमकी देना, या शारीरिक नज़दीकी या तस्वीरें शेयर करने के लिए दबाव डालना, ये सब ख़तरे के संकेत हैं।
दबाव कुछ ऐसा सुनाई दे सकता है: अगर तुम मुझसे प्यार करते, तो करते। या: बाकी सब तो करते हैं। आप किसी को भी शारीरिक नज़दीकी या तस्वीरें देने के लिए कभी बाध्य नहीं हैं।
अस्वस्थ व्यवहार किसी भी रिश्ते में, किसी भी जेंडर के लोगों के बीच हो सकता है।
क़ानून क्या कहता है
भारत में क़ानून 18 साल से कम उम्र के हर व्यक्ति को बच्चा मानता है। POCSO क़ानून (पॉक्सो एक्ट) के तहत 18 साल से कम उम्र के किसी के भी साथ यौन गतिविधि (सेक्शुअल एक्टिविटी) अपराध है, और यह हर जेंडर के बच्चों की सुरक्षा करता है।
18 साल से कम उम्र के किसी की भी यौन तस्वीरें बनाना, माँगना या शेयर करना भी गंभीर अपराध है, भले ही तस्वीर वाला व्यक्ति राज़ी हो या आपकी ही उम्र का हो।
क़ानून युवाओं को नुकसान से बचाने के लिए है। अगर कोई आप पर दबाव डाल रहा है या आपको चोट पहुँचा रहा है, तो आप मदद ले सकते हैं।