अपनी सेहत की कहानी खुद जानें
अब तक शायद आपके माता-पिता आपकी सेहत की बातें आपके लिए याद रखते थे। अब इन्हें खुद सीखना शुरू करें: आपका ब्लड ग्रुप, एलर्जी, पहले की बीमारियाँ और ऑपरेशन, नियमित दवाइयाँ, और परिवार में डायबिटीज़ (शुगर) या दिल की बीमारी जैसी समस्याओं का इतिहास।
अपने टीकाकरण रिकॉर्ड और ज़रूरी रिपोर्ट की एक कॉपी अपने पास रखें। ABHA जैसा डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड सब कुछ एक जगह रखने में आपकी मदद कर सकता है।
अपॉइंटमेंट लेना और इलाज के लिए जाना
डॉक्टर का अपॉइंटमेंट लेना, पास का सरकारी स्वास्थ्य केंद्र ढूँढना और फ़ार्मेसी (दवा की दुकान) का इस्तेमाल करना सीखें।
18 साल का होने के बाद आप अकेले डॉक्टर को दिखा सकते हैं और आपकी जानकारी गोपनीय रहती है। 18 से कम उम्र में डॉक्टर माता-पिता या अभिभावक को शामिल कर सकते हैं, खासकर जब सुरक्षा का सवाल हो।
पता करें कि क्या आप परिवार के हेल्थ इंश्योरेंस या किसी सरकारी स्वास्थ्य योजना में शामिल हैं, और उसकी जानकारी हाथ में रखें।
रोज़ के सुरक्षित फ़ैसले
दोपहिया वाहन पर हेलमेट और कार में सीटबेल्ट पहनें। शराब पीने या ड्रग्स लेने के बाद कभी गाड़ी न चलाएँ, और ऐसे व्यक्ति के साथ कभी गाड़ी में न बैठें जिसने ऐसा किया हो।
तंबाकू किसी भी रूप में, जिसमें गुटखा और वेप भी शामिल हैं, सेहत को नुकसान पहुँचाता है और इसकी लत बहुत जल्दी लगती है। भारत में वेप बेचने पर रोक है। छोड़ने में मदद डॉक्टरों और क्विटलाइन (छोड़ने में मदद करने वाली हेल्पलाइन) से मिल सकती है।
शराब और ड्रग्स सोचने-समझने की क्षमता, नींद, मूड और सुरक्षा पर असर डालते हैं। अगर कानूनी उम्र होने के बाद आप पीना चुनते हैं, तो अपनी सीमा जानें और अपने दोस्तों का ध्यान रखें।
आपकी सेहत की किट
ज़रूरी नंबर सेव करें: इमरजेंसी के लिए 112, कई राज्यों में एम्बुलेंस के लिए 108, टेली-मानस (Tele-MANAS) 14416, और अपने डॉक्टर का नंबर।
एक बुनियादी फ़र्स्ट एड किट रखें: पट्टियाँ, एंटीसेप्टिक, थर्मामीटर और वे दवाइयाँ जो आपके डॉक्टर ने आपके लिए लिखी हैं।
बुनियादी चीज़ों के लिए समय निकालें: नींद, नियमित खाना, चलना-फिरना, दोस्त और आराम।