कितनी गतिविधि ज़रूरी है
किशोरों को रोज़ औसतन कम से कम 60 मिनट मध्यम से तेज़ गतिविधि करने की कोशिश करनी चाहिए, जैसे तेज़ चलना, साइकिल चलाना, फ़ुटबॉल, बैडमिंटन, डांस या तैराकी।
हफ़्ते में कम से कम तीन दिन ऐसी गतिविधियाँ होनी चाहिए जो माँसपेशियों और हड्डियों को मज़बूत करें, जैसे अपने शरीर के वज़न वाली कसरतें (बॉडीवेट एक्सरसाइज़), चढ़ना, कूदना या किसी की निगरानी में वज़न उठाना (वेट ट्रेनिंग)।
सही तरीके से की जाए तो स्ट्रेंथ ट्रेनिंग सुरक्षित है
सही तकनीक और निगरानी के साथ स्ट्रेंथ ट्रेनिंग किशोरों के लिए सुरक्षित है और इससे लंबाई बढ़ना नहीं रुकता।
शुरुआत अपने शरीर के वज़न वाली कसरतों से करें, जैसे स्क्वैट्स, पुश-अप्स और प्लैंक। वज़न जोड़ने से पहले सही तरीका (फ़ॉर्म) सीखें, और धीरे-धीरे बढ़ाएँ।
लक्ष्य ज़्यादा मज़बूत बनना और चलने-फिरने का मज़ा लेना हो, न कि अपने शरीर का रूप जल्दी बदलना।
चोट से बचाव
कसरत से पहले 5 से 10 मिनट वार्म-अप करें और बाद में कूल-डाउन करें।
आराम के दिनों में माँसपेशियाँ ठीक होती हैं और बढ़ती हैं। साल भर बिना ब्रेक के एक ही खेल खेलने से ज़्यादा इस्तेमाल से होने वाली चोटों (ओवरयूज़ इंजरी) का खतरा बढ़ता है; अलग-अलग गतिविधियाँ मिलाकर करने से मदद मिलती है।
कसरत से पहले, उसके दौरान और बाद में पानी पिएँ, खासकर भारत की गर्मियों में। दिन के सबसे गर्म समय में ज़ोरदार कसरत न करें।
अपने शरीर की सुनें
कोई नई कसरत करने के एक-दो दिन बाद माँसपेशियों में दर्द (अकड़न) होना सामान्य है। तेज़ चुभने वाला दर्द, सूजन, बढ़ता हुआ दर्द, या आराम से ठीक न होने वाला दर्द सामान्य नहीं है।
खेल में सिर पर लगी कोई भी चोट, खासकर अगर साथ में सिरदर्द, चक्कर, उलझन (कन्फ़्यूज़न) या उल्टी हो, तो इसका मतलब है खेलना बंद करें और दोबारा खेलने से पहले डॉक्टर से जाँच करवाएँ।
जिम में या ऑनलाइन बिकने वाले माँसपेशी बढ़ाने वाले पाउडर और गोलियों से बहुत सावधान रहें। कुछ में छिपे हुए स्टेरॉयड या दूसरे नुकसानदेह पदार्थ होते हैं। लगभग सभी युवा खिलाड़ियों के लिए खाना ही काफ़ी है।