किशोरों को रात में नींद क्यों नहीं आती
प्यूबर्टी (किशोरावस्था) के दौरान आपकी बॉडी क्लॉक खिसक जाती है। नींद का हार्मोन मेलाटोनिन शाम को देर से निकलता है, इसलिए हो सकता है आपको रात में देर तक नींद न आए।
पर स्कूल, कोचिंग और ट्यूशन अक्सर सुबह जल्दी शुरू हो जाते हैं। इस बेमेल की वजह से बहुत-से किशोरों की नींद पूरी नहीं होती।
आपको कितनी नींद चाहिए
13 से 18 साल के किशोरों को हर रात लगभग 8 से 10 घंटे की नींद चाहिए।
नींद कम होने के संकेत: सुबह उठने में मुश्किल, क्लास में झपकी आना, दिन निकालने के लिए कैफ़ीन की ज़रूरत, चिड़चिड़ापन, ध्यान न लगना और वीकेंड पर बहुत देर तक सोना।
बहुत कम नींद का संबंध कम नंबर, ज़्यादा दुर्घटनाएँ, उदास मूड, ज़्यादा बार बीमार पड़ने और मीठी चीज़ों की ज़्यादा भूख से है।
फ़ोन और नींद
स्क्रीन से निकलने वाली रोशनी मेलाटोनिन को देर से निकलने देती है, और रोमांचक कंटेंट दिमाग़ को जगाए रखता है। नोटिफ़िकेशन रात में आपको जगा सकते हैं।
अपना फ़ोन बेडरूम के बाहर चार्ज करके देखिए, या कम से कम कमरे के दूसरे कोने में, नोटिफ़िकेशन बंद करके। सोने से लगभग एक घंटा पहले स्क्रॉल करना बंद कर दीजिए।
नींद की बेहतर आदतें
बॉडी क्लॉक को स्थिर रखने के लिए उठने का समय तय रखिए, वीकेंड पर भी। सुबह दिन की रोशनी में कुछ समय बिताइए।
दोपहर और शाम को चाय, कॉफ़ी, कोला और एनर्जी ड्रिंक्स से बचिए।
अपना कमरा अँधेरा, ठंडा और शांत रखिए। अगर आप कमरा किसी के साथ शेयर करते हैं, तो आई मास्क या ईयरप्लग मदद कर सकते हैं।
स्कूल के बाद लगभग 30 मिनट से कम की छोटी झपकी मदद कर सकती है। देर तक और देर से ली गई लंबी झपकी से रात में सोना मुश्किल हो जाता है।