बड़े बदलावों का समय
बीस से तीस की उम्र के बीच अक्सर बहुत बड़े बदलाव आते हैं: घर छोड़ना, हॉस्टल, प्रतियोगी परीक्षाएँ, पहली नौकरी, पैसों का दबाव, रिश्ते, और करियर या शादी को लेकर परिवार की उम्मीदें।
मानसिक सेहत से जुड़ी बहुत सी समस्याएँ पहली बार किशोरावस्था के आखिरी सालों से लेकर पच्चीस के आसपास की उम्र के बीच सामने आती हैं। संकेत जानने से आप जल्दी कदम उठा पाते हैं।
किन संकेतों को गंभीरता से लें
दो हफ़्ते या उससे ज़्यादा समय तक ज़्यादातर दिन उदास, खालीपन या निराशा महसूस करना, जिन चीज़ों में मज़ा आता था उनमें दिलचस्पी खत्म हो जाना, या नींद या भूख में बड़े बदलाव।
लगातार चिंता, पैनिक अटैक (घबराहट के दौरे), लोगों या जगहों से बचना, या मुश्किलों से निपटने के लिए शराब या ड्रग्स का सहारा लेना।
खुद को नुकसान पहुँचाने या आत्महत्या के विचार आना इस बात का संकेत है कि तुरंत मदद लें, किसी भरोसेमंद व्यक्ति, डॉक्टर या हेल्पलाइन से।
अपना ध्यान रखना
बुनियादी चीज़ों को बचाकर रखें: नियमित नींद, खाना, चलना-फिरना और दिन की रोशनी। उन लोगों से जुड़े रहें जिनके साथ आपको अच्छा लगता है, चाहे छोटी-छोटी कॉल के ज़रिए ही सही।
काम और पढ़ाई की सीमाएँ तय करें, और जब स्क्रीन और खबरें आपको थका दें तो उनसे ब्रेक लें।
शराब और ड्रग्स उस पल में मदद करते लग सकते हैं, पर अक्सर चिंता और उदासी को और बढ़ा देते हैं।
मदद ढूँढना
बहुत से कॉलेजों और दफ़्तरों में काउंसलर होते हैं। क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट बातचीत वाली थेरेपी देते हैं, और साइकेट्रिस्ट (मनोरोग विशेषज्ञ) ऐसे डॉक्टर हैं जो ज़रूरत पड़ने पर इलाज भी लिख सकते हैं।
टेली-मानस (Tele-MANAS) 14416 भारत सरकार की मुफ़्त, गोपनीय, 24x7 मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन है, जो कई भाषाओं में उपलब्ध है और आपको आगे के इलाज से भी जोड़ सकती है।
मदद माँगना ताकत की निशानी है। थेरेपी और इलाज ज़्यादातर लोगों के लिए काम करते हैं।
किसी दोस्त का साथ देना
अगर कोई दोस्त मुश्किल में लगे, तो सीधे और प्यार से पूछें: मैंने देखा है कि तुम कुछ उदास लग रहे हो। सच में कैसे हो? बिना आँके और बिना जल्दी से हल बताए, उसकी बात सुनें।
किसी से यह पूछने से कि क्या वह आत्महत्या के बारे में सोच रहा है, उसके मन में यह विचार नहीं आता। इससे मदद का रास्ता खुल सकता है।
उसे किसी विशेषज्ञ या हेल्पलाइन से संपर्क करने के लिए हिम्मत दें, और अगर वह खतरे में है तो उसके साथ रहें। अपना भी ध्यान रखें।