हर शरीर बढ़ता है
जिस दिन तुम पैदा हुए, उसी दिन से तुम्हारा शरीर बढ़ रहा है। तुम्हारी हड्डियाँ लंबी होती हैं, माँसपेशियाँ मज़बूत होती हैं और तुम्हारा दिमाग़ हर दिन नई बातें सीखता रहता है।
हो सकता है तुम्हें लगे कि स्कूल की पुरानी यूनिफ़ॉर्म छोटी हो गई है, या चप्पल अब पैर में नहीं आती। इसका मतलब है कि तुम्हारा शरीर अपना काम कर रहा है।
तुम्हारे परिवार के बड़े भी तुम्हारी उम्र में इन्हीं बदलावों से गुज़रे थे।
शरीर कई आकार और कद के होते हैं
अपनी कक्षा में चारों ओर देखो। कुछ दोस्त लंबे हैं, कुछ छोटे। किसी के बाल घुँघराले हैं, किसी के सीधे। त्वचा भी कई सुंदर रंगों की होती है।
शरीर के दिखने का कोई एक सही तरीका नहीं है। तुम्हारा शरीर तुम्हारे लिए सही है।
शरीर अलग-अलग रफ़्तार से भी बढ़ते हैं। हो सकता है कोई दोस्त इस साल लंबा हो जाए और तुम अगले साल। दोनों बातें सामान्य हैं।
सही नाम जानना
शरीर के हर हिस्से का असली नाम जानना अच्छा है, ठीक वैसे ही जैसे तुम कोहनी, घुटना और पेट जानते हो।
जो हिस्से अंडरवियर से ढके रहते हैं, उन्हें निजी अंग (प्राइवेट पार्ट्स) कहते हैं। लड़कियों के बाहर आमतौर पर योनिमुख (वल्वा) और अंदर योनि (वजाइना) होती है। लड़कों के आमतौर पर लिंग (पीनिस) और अंडकोष (टेस्टिकल्स) होते हैं। हर किसी के कूल्हे होते हैं, और हर किसी की छाती होती है।
सही नाम लेना बदतमीज़ी नहीं है। इससे तुम डॉक्टर या किसी भरोसेमंद बड़े को साफ़-साफ़ बता पाते हो कि कुछ दर्द कर रहा है या ठीक नहीं लग रहा।
अपने शरीर का ध्यान रखना
तुम्हारे शरीर को अच्छा खाना, साफ़ पानी, भरपूर नींद, खेलने का समय और साबुन से अच्छी तरह नहाना-धोना चाहिए।
अगर शरीर पर कहीं दर्द हो, खुजली हो या कुछ अलग दिखे और तुम्हें चिंता हो, तो माता-पिता, टीचर या किसी भरोसेमंद बड़े को बताओ। ज़रूरत हो तो वे तुम्हें डॉक्टर के पास ले जा सकते हैं।